आँसू (छंद - देव घनाक्षरी) - बबिता बिटू जैन

आँसू 



बबिता बिटू जैन, भिवंडी (महाराष्ट्र) भारत


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माना होते खारे आंसू , लगते प्यारे आंसू , मिलती  थोडी राहत, जाते है  टपक टपक


 खुशी में छलक पड़े, खुशियों की धार आंसू,  साहरा बनते आसू ,जाते हैं  छलक छलक 


लगे जैसे शबनम, कभी तो शरारे आंसू, मोतियो जेसे होते  ये ,जाते हैं  लुड़क लुड़क


बेजुबा दिल की जुबा, लगते सितारे आंसू , जैसे बेठे पलकों पे ,चमके ठिठक ठिठक।


 


छंद - देव घनाक्षरी
(विधान -8,8,8,9 यह एक वार्णिक छंद है।16,17 पर यति।चार चरण समतुकान्त होते हैं।अंतिम शब्द नगन (111) की आवृत्ति)


 


परिचय-


बबिता बिटू जैन


रुचि- गद्य व पद्य की समस्त प्रचलित विधाओं में सृजन व विविध पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशन

उद्देश्य- हिंदी को लोकप्रिय राष्ट्रभाषा बनाना


 


 


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